नई दिल्ली: संसद ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा ने गुरुवार को विधेयक को मंजूरी दी, जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश किया।
संशोधित कानून में पेपर लीक, नकल और अन्य परीक्षा संबंधी कदाचार पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और संपत्ति जब्त करने जैसी कठोर सजा का प्रावधान रखा गया है।
इसके अलावा, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएंगी। जांच पुलिस में मामला दर्ज होने के दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी, जबकि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर सुनवाई समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह कानून युवाओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विधेयक को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि केवल कानून में संशोधन से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों के विरोध के बाद यह कदम उठाया है। चर्चा के दौरान विपक्ष ने सदन से वॉकआउट भी किया।
नीट परीक्षा पर भी हुई बहस
डीएमके के तिरूचि शिवा और समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने नीट परीक्षा समाप्त करने की मांग उठाई। वहीं भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नीट सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मंच है।
भाजपा के ब्रिज लाल ने कहा कि संशोधन से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और जांच के लिए विशेष कार्यबल का गठन भी किया जाएगा।
अन्य सांसदों ने भी रखे विचार
एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल, आप के संजय सिंह, जदयू के संजय कुमार झा, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, एआईएडीएमके के थंबी दुरई, वाईएसआरसीपी के सुब्बा रेड्डी, बीजद के संतृप्त मिश्रा और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी चर्चा में भाग लिया।
सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के उद्देश्य से लाया गया है।

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