बार-बार बदलते रोस्टर ने चढ़ाया सियासी पारा, चौथी बार हुआ बदलाव, चुनावी दंगल में कूदने वालों की धडक़न बेकाबू

April 09, 2026


 हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की घोषणा से पहले ही सियासी पारा अपने उफान पर है। मुद्दा है आरक्षण और रोस्टर का। प्रदेश में आरक्षण नियमों को लेकर मचे घमासान के बीच अब चौथी बार नया रोस्टर जारी किया गया है। सरकार के बार-बार बदलते फैसलों ने जहां भावी उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है, वहीं विपक्ष भी पंचायत चुनावों के सस्पेंस को लेकर हमलावर है। पंचायत इसकी शुरुआत तब हुई, जब सरकार ने घोषणा की कि इस बार आरक्षण पूरी तरह नए सिरे से तय होगा। इस खबर के आते ही भावी उम्मीदवारों ने अपनी गोटियां सेट करनी शुरू कर दीं, लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिन नहीं टिका। सरकार जल्द ही अपने कदम पीछे खींचती नजर आई और नया फरमान जारी हुआ कि जो पंचायतें लगातार दो बार आरक्षित रही हैं, उन्हें इस बार सामान्य कर दिया जाएगा। विवाद तब और गरमाया जब तीसरे चरण में सरकार ने जिलाधिकारियों को पांच प्रतिशत तक आरक्षण तय करने की विशेष शक्तियां दे दीं।

इस फैसले को आनन-फानन में हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने सरकार के इस कदम पर ब्रेक लगा दिया, जिससे चुनावी तैयारियों पर असमंजस के बादल छा गए। अदालती दखल के बाद अब चौथी बार जारी रोस्टर में सरकार ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है। नए नियमों में फिर से दो बार आरक्षित रही पंचायतों को इस बार आरक्षित न करने की बात दोहराई गई है, जबकि पंचायती राज अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण को सख्ती से लागू किया जाना है। इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए संवैधानिक कोटा सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है। ऐसे में बार-बार बदलते नियमों ने प्रदेश की राजनीति को दो धड़ों में बांट दिया है। विपक्ष इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बता रहा है। वहीं, प्रदेश सरकार का तर्क है कि आरक्षण की प्रक्रिया जटिल है और वे सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए नियमों को पारदर्शी बना रहे हैं।


समीकरणों से परेशान


नियमों के इस यू-टर्न से सबसे ज्यादा परेशान वो उम्मीदवार हैं, जो पिछले कई महीनों से जमीन पर पसीना बहा रहे हैं। रोस्टर बदलते ही कई दिग्गजों की सीटें सुरक्षित से सामान्य या सामान्य से आरक्षित हो गई हैं।

बार-बार बदलते रोस्टर ने चढ़ाया सियासी पारा, चौथी बार हुआ बदलाव, चुनावी दंगल में कूदने वालों की धडक़न बेकाबू बार-बार बदलते रोस्टर ने चढ़ाया सियासी पारा, चौथी बार हुआ बदलाव, चुनावी दंगल में कूदने वालों की धडक़न बेकाबू Reviewed by SBR on April 09, 2026 Rating: 5

Kanpur kidney scandal: जेल में 5 घंटे की पूछताछ, मास्टरमाइंड ने उगले 16 डॉक्टरों के नाम, 40 से ज्यादा अवैध सर्जरी का खुलासा

April 09, 2026


 उत्तर प्रदेश के चर्चित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल से पुलिस ने जेल के भीतर मंगलवार को मैराथन पूछताछ की। पांच घंटे तक चली इस कड़ी पूछताछ में पुलिस ने 50 से अधिक सवालों की बौछार की, जिसके बाद आरोपी ने इस काले कारोबार के कई चौंकाने वाले राज खोल दिए हैं।


पूछताछ में हुए बड़े खुलासे

शिवम अग्रवाल ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह अब तक 6 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट खुद करवा चुका है। हालांकि, पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपी के नेटवर्क के जरिए कानपुर में अब तक 40 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपी के बयान के आधार पर 16 बड़े डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। साथ ही 10 से ज्यादा नर्सिंग होम और अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रिया अस्पताल और अहूजा अस्पताल जैसे संस्थानों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध तरीके से किडनी बदली जाती थी। यह रैकेट सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दिल्ली और उत्तराखंड तक भी जुड़े हुए हैं।


10 लाख में सौदा, 1 करोड़ में वसूली

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह गरीब युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना शिकार बनाता था। किडनी देने वाले को महज 8 से 10 लाख रुपए का लालच दिया जाता था। वहीं, जिसे किडनी की जरूरत होती थी, उस मरीज से यह गिरोह 60 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपए तक वसूलता था।


पुलिस की छापेमारी और नई टीमें

शिवम अग्रवाल के खुलासे के बाद पुलिस कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें यूपी के अन्य जिलों के साथ-साथ दिल्ली और उत्तराखंड में भी छापेमारी कर रही हैं। मार्च में इस रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से ही पुलिस लगातार साक्ष्य जुटा रही थी, जिसमें अब कई महत्वपूर्ण वीडियो और चैट भी हाथ लगे हैं।


फर्जी डॉक्टर बनकर जाल बिछाता था शिवम

बता दें कि शिवम अग्रवाल खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को गुमराह करता था। वह अस्पतालों के साथ सांठगांठ कर डोनर्स और मरीजों के बीच कड़ी का काम करता था। मार्च के अंत में कल्यानपुर-रावतपुर क्षेत्र के निजी अस्पतालों पर हुई छापेमारी के बाद से ही इस रैकेट की परतों का खुलना जारी है।

Kanpur kidney scandal: जेल में 5 घंटे की पूछताछ, मास्टरमाइंड ने उगले 16 डॉक्टरों के नाम, 40 से ज्यादा अवैध सर्जरी का खुलासा Kanpur kidney scandal: जेल में 5 घंटे की पूछताछ, मास्टरमाइंड ने उगले 16 डॉक्टरों के नाम, 40 से ज्यादा अवैध सर्जरी का खुलासा Reviewed by SBR on April 09, 2026 Rating: 5

नाबालिग ने घर से गहने चोरी कर लिया गोल्ड लोन, फोन के लिए दो लोगों की मदद से फाइनांस कंपनी से उठाया पैसा

April 09, 2026

 


पुलिस थाना नादौन के तहत आने वाले क्षेत्र से गहने चोरी का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। नाबालिग ने अपने ही घर से सोने के गहने चोरी किए तथा दो लोगों की मदद से फाइनांस कंपनी में जमा करवाकर गोल्ड लोन प्राप्त किया। यह भी बात सामने आई है कि नाबालिग ने मोबाइल इत्यादि लेने के लिए यह हरकत की है। हालांकि जब मामला पुलिस में दर्ज हुआ तो परतें उधड़ती चली गईं। मामले में नाबालिग लडक़े सहित एक व्यक्ति व महिला भी संलिप्त पाए गए हैं। नादौन थाना में मुकेश कुमार निवासी गांव गगाल डा. भरमोटी नादौन द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई कि उसकी पत्नी के सोने के गहने घर की अलमारी से चोरी हो गए हैं। शिकायत में मांग टीका, दो नथ, दो जोड़ी झुमके तथा दो अंगूठियां चोरी होना बताया गया।


इस संबंध में पुलिस थाना नादौन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता का बेटा नाबालिग है, जिसने पूछताछ में बताया कि उसने उक्त सोने के गहने व्यक्ति निवासी गांव कुठार भरमोटी नादौन को दे दिए थे। आगे पूछताछ करने पर सामने आया कि व्यक्ति ने अपनी बहन निवासी टिल्लू, डा. बेला नादौन के साथ मिलकर उक्त गहनों को फाइनांस कंपनी नादौन शाखा में गिरवी रखकर गोल्ड लोन प्राप्त किया। पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए गिरवी रखे गए गहनों को बरामद किया है। पुलिस अधीक्षक हमीरपुर बलवीर ङ्क्षसह ठाकुर ने बताया कि तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

नाबालिग ने घर से गहने चोरी कर लिया गोल्ड लोन, फोन के लिए दो लोगों की मदद से फाइनांस कंपनी से उठाया पैसा नाबालिग ने घर से गहने चोरी कर लिया गोल्ड लोन, फोन के लिए दो लोगों की मदद से फाइनांस कंपनी से उठाया पैसा Reviewed by SBR on April 09, 2026 Rating: 5

Government announces relief measures for domestic airlines; Cuts airport charges by 25 per cent

April 09, 2026


 Union Civil Aviation Minister Ram Mohan Naidu has announced a series of relief measures for domestic airlines, including a 25 percent reduction in landing and parking charges. The move is aimed at easing operational cost pressures on Indian carriers and ensuring that air travel remains affordable for passengers despite rising global fuel prices.


 


The Ministry of Civil Aviation (MoCA) said the aviation sector has been impacted by a sharp increase in Aviation Turbine Fuel (ATF) prices due to global crude oil volatility. As part of the latest intervention, the Ministry has directed the Airports Economic Regulatory Authority (AERA) to reduce landing and parking charges by 25 percent at all major airports for domestic flights.


 


The reduction has come into force with immediate effect and will remain in place for three months. Similarly, the Airports Authority of India (AAI) has been instructed to implement the same reduction at non-major airports across the country. The government estimates that the move will reduce airlines’ expenses by approximately 400 crore rupees over the three-month period.


 


Speaking on the decision, Mr Naidu said the government’s priority is to maintain stability in the aviation sector while ensuring affordability and convenience for passengers. He added that the measures are part of a broader strategy to support airlines in managing rising costs without significantly increasing airfares.


 


The Ministry said it is in constant consultation with stakeholders, including airlines, airport operators, and regulators, to monitor the situation and take timely action. It also clarified that any revenue shortfall faced by airports due to the reduced charges will be adjusted during future tariff determinations.

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सही स्ट्रीम देगी भाविष्य को नई दिशा, किसी ट्रेंड या दबाव के आधार पर न करें स्ट्रीम का चुनाव

April 08, 2026

 




10वीं कक्षा के बाद स्ट्रीम चुनना हर छात्र के जीवन का एक अहम फैसला होता है। यह केवल आगे की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि करियर की दिशा भी तय करता है। जब विकल्प सामने आते हैं -साइंस, कॉमर्स और आट्र्स – तो अकसर विद्यार्थी और उनके माता-पिता भ्रम में पड़ जाते हैं। हर कोई अपनी राय देता है, लेकिन सही स्ट्रीम कौन-सी है? इसका जवाब हर छात्र के इंटरेस्ट, एबिलिटी और लक्ष्य पर निर्भर करता है। कोई भी स्ट्रीम आपके करियर को प्रभावित करती है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप सही निर्णय लें। जब हम स्ट्रीम चुनने की बात करते हैं, तो यह किसी के जीवन का एक इम्पोर्टेंट डिसिशन होता है। सही स्ट्रीम का च्वॉइस आपके फ्यूचर को इंप्रेस कर सकता है।



जब हम स्ट्रीम चुनने की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने इंटरेस्ट पर ध्यान देना चाहिए। इंटरेस्ट से ही हमें पता चलता है कि हमें क्या पसंद है और हम किसमें अच्छे हैं। यह आपको आगे चलकर सही डायरेक्शन में गाइड करेगा। जैसे- अगर आपको गणित और विज्ञान में इंटरेस्ट है, तो विज्ञान स्ट्रीम को चुनना सही हो सकता है। अगर आपको राइटिंग, आर्ट और हिस्ट्री में रुचि है, तो आट्र्स स्ट्रीम सही हो सकती है।


एडवाइस: अपने आप से पूछें कि आपको क्या पसंद है? क्या आपको खेल, चित्रकला, विज्ञान, गणित, या भाषा में रुचि है? यही वह समय है जब आपको अपनी रुचियों को समझने की जरूरत है।


अपने स्किल्स को समझें

अपने स्किल्स यानी कौशल को पहचानना भी बहुत जरूरी है। क्या आप गणित में अच्छे हैं? क्या आप लिखने में अच्छा महसूस करते हैं या क्या आप किसी विशेष विषय में अच्छे नंबर ला सकते हैं? यह सब आपको ये समझने में मदद करेगा कि आप किस स्ट्रीम में बेटर परफॉरमेंस कर सकते हैं। जैसे- अगर आप गणित और विज्ञान में अच्छे हैं, तो विज्ञान या इंजीनियरिंग जैसे करियर ऑप्शंस आपके लिए बेहतर हो सकते हैं। अगर आपको कला, संगीत या थिएटर में रुचि है, तो आट्र्स स्ट्रीम आपके लिए बेहतर हो सकती है।


एडवाइस: अपनी ताकत को पहचानें और उसी दिशा में आगे बढ़ें। अगर आप विज्ञान में अच्छे हैं, तो उसे ही आगे बढ़ाएं। हमेशा अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें।


अवसरों पर ध्यान दें


स्ट्रीम चुनते समय यह भी जानना जरूरी है कि आपके चुने हुए विषय में आगे चलकर क्या करियर के अवसर हैं। जैसे, साइंस स्ट्रीम के बाद आप इंजीनियरिंग, मेडिकल, या रिसर्च जैसे क्षेत्रों में जा सकते हैं। वहीं आट्र्स स्ट्रीम के बाद आप पत्रकारिता, मानविकी, राजनीति या शिक्षण जैसे करियर विकल्पों को चुन सकते हैं। जैसे- अगर आप मेडिकल क्षेत्र में रुचि रखते हैं, तो साइंस स्ट्रीम को चुनना सही होगा। अगर आपको आर्थिक मामलों, राजनीति या सामाजिक मुद्दों में रुचि है तो आट्र्स स्ट्रीम आपके लिए सही होगी।


एडवाइस: आपके चुने हुए विषय के आधार पर भविष्य के करियर के अवसरों के बारे में जानें। क्या वे क्षेत्र आपकी रुचि और अवसरों के लिए सही है? क्या आपके पास उस क्षेत्र में काम करने के अच्छे मौके होंगे?


डिफीकल्टी लेवल को ध्यान में रखें


कुछ स्ट्रीम में लंबी एजुकेशन पीरियड होती है, जैसे मेडिकल और इंजीनियरिंग, जिनमें लंबी पढ़ाई करनी होती है, जबकि आट्र्स स्ट्रीम में कई करियर फील्ड्स के लिए कम समय लगता है और कई बार फ्रीलांस में भी काम किया जा सकता है। यदि आपको लंबी पढ़ाई पसंद नहीं है और आप जल्दी अपने करियर में कदम रखना चाहते हैं, तो छोटे और आसानी से एक्सेसिबल ऑप्शन को चुनना बेहतर रहेगा।


एडवाइस: अपने करियर की योजना को ध्यान में रखते हुए एजुकेशन पीरियड को जानें। यदि आप जल्दी से काम करना चाहते हैं तो कुछ छोटा या कम समय का कोर्स भी चुन सकते हैं।


भविष्य में बदलते अवसरों के बारे में सोचें


आजकल टेक्नोलॉजी और नई-नई इंडस्ट्रीज आ रही हैं, जो भविष्य में बहुत अच्छा करियर ऑप्शन हो सकती हैं। जैसे एआई, डाटा साइंस, रोबोटिक्स और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं। इसलिए, यह ध्यान में रखते हुए अपनी स्ट्रीम का चुनाव करें।


एडवाइस: सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाली नई इंडस्ट्रीज और करियर ऑप्शंस के बारे में सोचें। जब आप स्ट्रीम चुनें, तो यह देखें कि आने वाले समय में वह क्षेत्र आपके लिए फायदे का हो सकता है या नहीं।


परिवार और दोस्तों की राय


आप अगर चाहें, तो आप आपके परिवार और दोस्तों से भी गाइडेंस ले सकते हैं, लेकिन याद रखें, अंतिम निर्णय आपका ही होना चाहिए। किसी और के मुताबिक निर्णय लेना आपके लिए सही नहीं हो सकता, क्योंकि यह आपका भविष्य है। जैसे- अगर आपके परिवार में अधिकतर लोग इंजीनियर हैं, तो हो सकता है कि वे आपको भी इंजीनियरिंग स्ट्रीम की ओर प्रेरित करें, लेकिन अगर आपकी इंटरेस्ट आट्र्स में है, तो आपको अपनी इंटरेस्ट को प्रायोरिटी देनी चाहिए।


एडवाइस: अपने परिवार और दोस्तों से मार्गदर्शन लें, लेकिन अपने इंटरेस्ट और अपनी ताकत को ध्यान में रखें। हमेशा अपनी पसंद पर विश्वास रखें।


सभी तरह के स्ट्रीम्स के बारे में जानें


कभी-कभी हमें यह समझने में दिक्कत होती है कि किस स्ट्रीम को चुनें। विज्ञान, आट्र्स और कॉमर्स तीन मेजर स्ट्रीम्स हैं, जिनमें से आपको एक का चुनाव करना होता है।


विज्ञान: इस स्ट्रीम में मैथमेटिक्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी जैसे विषय होते हैं। इसमें आगे इंजीनियरिंग, मेडिकल, रिसर्च जैसी करियर के विकल्प हैं।


आट्र्स: इस स्ट्रीम में हिस्ट्री, जियोग्राफी, पॉलिटिक्स, सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी, लिटरेचर आदि होते हैं। इसमें करियर के विकल्प जैसे जर्नलिज्म, राइटिंग, एंटरटेनमेंट, टीचिंग, आट्र्स में होते हैं।


कॉमर्स: इसमें अकाउंटिंग, इकोनॉमिक्स, बिजनेस, फाइनांस आदि विषय होते हैं। इसमें करियर के अच्छे अवसर होते हैं, जैसे बिजनेस, फाइनांस, मार्केटिंग और आर्गेनाइज्ड मैनेजमेंट में।


एडवाइस: इन तीनों स्ट्रीम्स के बारे में अच्छे से जानकारी लें और यह सोचें कि कौन सा क्षेत्र आपके लिए सबसे अच्छा रहेगा।


उपलब्ध रिसोर्सेज का यूज करें


आजकल, इंटरनेट पर करियर काउंसलिंग और गाइडेंस के कई माध्यम उपलब्ध हैं। आप ऑनलाइन कोर्स और वर्कशॉप्स के माध्यम से अपनी रुचियों और भविष्य के विकल्पों के बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं।


एडवाइस: इंटरनेट का यूज करके, विभिन्न करियर गाइड और काउंसलिंग सेशंस का हिस्सा बनें। यह आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा।


निर्णय लेने से पहले समय लें


किसी भी स्ट्रीम का च्वॉइस बहुत सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि यह आपका भविष्य तय करेगा। यह जरूरी नहीं कि आप एक ही दिन में डिसीजन ले लें। सही स्ट्रीम का चुनाव करने के लिए समय लें, सोचें और फिर निर्णय लें। जल्दबाजी में फैसला न लें। सही दिशा में सोचने के लिए समय लें और अपने आत्मविश्वास को बढ़ाएं।


कुछ वैल्युएबल एडवाइस: अपने दिल की सुनें, क्योंकि यह आपको सही दिशा दिखाएगा। आत्म-विश्वास रखें। कभी-कभी दूसरों से अलग रास्ता चुनने से ही सफलता मिलती है। मुझे लगता है, मैं क्या कर सकता हूं, इस पर ध्यान दें, न कि केवल आपके पास क्या है। टाइम मैनेजमेंट सीखें। जब आप एक स्ट्रीम चुनते हैं, तो यह भी ध्यान रखें कि समय और मेहनत कितनी जरूरी होगी।


मेंटल हैल्थ का ख्याल रखें


कभी-कभी छात्रों को परिवार, दोस्तों और समाज के दबाव के कारण गलत स्ट्रीम का चुनाव करना पड़ता है। यह उनके मेंटल हैल्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए, सबसे जरूरी बात यह है कि आप जो स्ट्रीम चुनें, वह आपकी मेंटल पीस और हेल्दी लाइफ के लिए सही हो।


एडवाइस: अगर आप किसी क्षेत्र में खुश नहीं हैं, तो बदलाव के बारे में सोचें। हमेेशा अपने मेंटल हैल्थ का ख्याल रखें।

सही स्ट्रीम देगी भाविष्य को नई दिशा, किसी ट्रेंड या दबाव के आधार पर न करें स्ट्रीम का चुनाव सही स्ट्रीम देगी भाविष्य को नई दिशा, किसी ट्रेंड या दबाव के आधार पर न करें स्ट्रीम का चुनाव Reviewed by SBR on April 08, 2026 Rating: 5

भंगरोटू वृद्ध आश्रम में सेवा कर पेश की मिसाल

April 07, 2026

 


क्षेत्र के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान हिल ऑक मॉडल स्कूल में आयोजित चार दिवसीय स्काउट्स एंड गाइड शिविर रविवार को हर्षोल्लास और सेवा के संकल्प के साथ संपन्न हो गया। समापन समारोह में स्कूल प्रिंसिपल हिमा खोसला ने मुख्यतिथि के रूप में शिरकत की और शिविर के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्काउट्स व गाइड्स को सम्मानित किया। वहीं शिविर की तीसरी शाम शनिवार को भव्य कैंप फायर का आयोजन किया गया,जिसमें स्कूल प्रबंधन समिति के पूर्व चेयरमैन कपिल सिंह सेन ने बतौर मुख्यतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने स्काउट्स और गाइड्स के साथ लंबा समय व्यतीत किया और उन्हें जीवन में अनुशासन व सेवा के महत्व पर विशेष मार्गदर्शिकाएं प्रदान कीं। कैंप फायर की पारंपरिक अग्नि के चारों ओर छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं,जिससे पूरा माहौल उत्साह से भर गया। पूर्व चेयरमैन ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी। वहीं शिविर का सबसे सराहनीय पहलू शनिवार को देखने को मिला,जब स्काउट्स और गाइड्स ने भंगरोटू स्थित वृद्ध आश्रम का दौरा किया। यहां नन्हें स्काउट्स ने न केवल बुजुर्गों के साथ समय बिताया और उनके अनुभव सुने,बल्कि आश्रम के कमरों और पूरे परिसर की गहन साफ-सफाई सुनिश्चित कर स्वच्छता का संदेश भी दिया।


बच्चों के इस सेवा भाव को देखकर आश्रम के बुजुर्ग भावुक हो उठे और उन्होंने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। वहीं समापन समारोह में मुख्यतिथि हिमा खोसला ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउटिंग छात्रों में आत्मनिर्भरता और राष्ट्र प्रेम की भावना पैदा करती है। उन्होंने शनिवार को वृद्ध आश्रम में बच्चों द्वारा किए गए सेवा कार्य और डायरेक्टर रोशन लाल कपूर द्वारा दिए गए मार्गदर्शन की विशेष सराहना की। कैंप कमांडर उषा देवी ने बताया कि चार दिवसीय इस कैंप के दौरान स्काउट्स को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया,जिसमेंअनुशासन व नियम, स्काउट प्रॉमिस और लॉ (नियमों) का विधिवत पालन। जीवन कौशल के तहत टेंट लगाना,विभिन्न प्रकार की गांठें बांधना और बिना बर्तनों के भोजन पकाना तथा प्राथमिक चिकित्सा में आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार ( फस्र्ट एड ) देने का प्रशिक्षण व अन्य जीवन में प्रयुक्त होने वली चीजों की जानकारी प्रदान की गई।

भंगरोटू वृद्ध आश्रम में सेवा कर पेश की मिसाल भंगरोटू वृद्ध आश्रम में सेवा कर पेश की मिसाल Reviewed by SBR on April 07, 2026 Rating: 5

दोबारा बनेगी वोटर लिस्ट, पुनर्गठन के विवाद में फंसी पंचायतों को लेकर HC के फैसले के बाद 13 तक मांगी आपत्तियां

April 07, 2026




 पंचायत चुनाव-2026 से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए उन ग्राम पंचायतों में मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण करने के निर्देश जारी किए हैं, जो सृजन और पुनर्गठन के विवाद में फंसी थीं। यह कदम प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि इन पंचायतों का सृजन या पुनर्गठन आगामी चुनावों में लागू नहीं माना जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब इन पंचायतों में मतदाता सूचियों को नए सिरे से अपडेट किया जाएगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार हो सके। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए पूरा कार्यक्रम भी तय कर दिया है। इसके तहत मतदाता सूची में नाम जोडऩे या हटाने के लिए दावे और आपत्तियां 13 अप्रैल तक दी जा सकेंगी। इनका निपटारा 17 अप्रैल तक किया जाएगा।

इसके बाद 20 तक अपील दाखिल की जा सकेगी और 22 अप्रैल तक अपीलों का निपटारा किया जाएगा। 24 अप्रैल तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि पहली अक्तूबर, 2025 को योग्यता तिथि मानते हुए तैयार मतदाता सूचियों को निरीक्षण के लिए जिला कार्यालय, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद कार्यालयों में उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुनरीक्षण प्राधिकारी उपलब्ध रहें और किसी भी प्रकार की छुट्टी या दौरे पर न जाएं, ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।

दोबारा बनेगी वोटर लिस्ट, पुनर्गठन के विवाद में फंसी पंचायतों को लेकर HC के फैसले के बाद 13 तक मांगी आपत्तियां दोबारा बनेगी वोटर लिस्ट, पुनर्गठन के विवाद में फंसी पंचायतों को लेकर HC के फैसले के बाद 13 तक मांगी आपत्तियां Reviewed by SBR on April 07, 2026 Rating: 5

बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, लाइफस्टाइल में बदलाव से बचाव संभव

April 07, 2026


 जिम करते-करते अचानक मौत, खेलते समय दिल की धड़कन रुक जाना या नाचते-गाते जिंदगी का थम जाना—COVID-19 के बाद और सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसी घटनाएं तेजी से सामने आई हैं। इन मामलों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है और दिल की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या किया जाए, यह आज हर किसी के लिए अहम मुद्दा बन चुका है।


लाइफस्टाइल बन रही सबसे बड़ी वजह


इंस्टिट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिजीजेज (IHLD) के चेयरमैन और कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉक्टर राहुल चंदोला के मुताबिक खराब जीवनशैली हार्ट संबंधी बीमारियों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। उन्होंने बताया कि संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद और तनाव से बचाव दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही 40 की उम्र के बाद नियमित हार्ट हेल्थ स्क्रीनिंग कराना भी अनिवार्य हो जाता है।


बिना चेतावनी के आते हैं 50% हार्ट अटैक


विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 50% हार्ट अटैक के मामले ऐसे होते हैं जिनमें पहले कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। यही वजह है कि लोग अक्सर समय रहते सावधानी नहीं बरत पाते। ऐसे में नियमित जांच और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।


खराब आदतें बढ़ा रही हैं खतरा


कम नींद लेना, ज्यादा तनाव में रहना, अनियमित दिनचर्या, प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और एक्सरसाइज की कमी—ये सभी दिल की बीमारियों को तेजी से बढ़ा रहे हैं। कई शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि आधुनिक जीवनशैली हार्ट हेल्थ पर सीधा असर डाल रही है।


रोजमर्रा की आदतों में करें बदलाव


दिल को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान लेकिन असरदार आदतें अपनाई जा सकती हैं। रोजाना 7 से 7:30 घंटे की पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर और दिल दोनों को आराम देती है। इसके साथ ही नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक करना चाहिए, जिससे शरीर सक्रिय रहता है और पसीना निकलने से फिटनेस बनी रहती है। हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। वहीं, समय पर और संतुलित आहार लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सही खानपान दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है।


प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप की बढ़ती अहमियत


डॉक्टर राहुल चंदोला, जो iLiveConnect के फाउंडर भी हैं, बताते हैं कि अब लोग बीमारी के बाद ही नहीं, बल्कि पहले से ही जांच कराने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। ईसीजी, इको और ब्लड टेस्ट जहां सामान्य जानकारी देते हैं, वहीं एंजियोग्राफी दिल की स्थिति का अधिक सटीक आकलन करती है, हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल और असुविधाजनक हो सकती है।


नई तकनीक से आसान हो रही निगरानी


हार्ट हेल्थ की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब नई तकनीक का सहारा भी लिया जा रहा है। iLive Connect का बायोसेंसर डिवाइस शरीर पर पैच की तरह लगाया जाता है, जो लगातार 5 दिनों तक 24 घंटे व्यक्ति की गतिविधियों के दौरान स्वास्थ्य की निगरानी करता है और सटीक रिपोर्ट देता है।


जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव


विशेषज्ञों का मानना है कि दिल की बीमारियों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता और समय पर सावधानी है। यदि लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें और नियमित जांच कराएं, तो हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, लाइफस्टाइल में बदलाव से बचाव संभव बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, लाइफस्टाइल में बदलाव से बचाव संभव Reviewed by SBR on April 07, 2026 Rating: 5

World Health Day : संतुलित जीवन शैली और जागरूकता ही रोगमुक्त जीवन की आधारशिला

April 07, 2026


 मानव सभ्यता के विकास का इतिहास यदि किसी एक सूत्र में पिरोया जा सकता है, तो वह है स्वास्थ्य। एक सुदृढ़ शरीर और संतुलित मन ही जीवन की वास्तविक सार्थकता को परिभाषित करते हैं। जब शरीर रोगमुक्त होता है और मन स्थिर व संयमित, तभी मनुष्य अपने कर्तव्यों, स्वप्नों और सामाजिक उत्तरदायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन कर पाता है। इसी शाश्वत सत्य को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को World Health Day मनाया जाता है, जिसकी स्थापना World Health Organization (WHO) ने 1948 में की थी। यह दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक प्रेरक आह्वान है। यह स्मरण दिलाने का कि “आरोग्यं परमं भाग्यं”, अर्थात स्वास्थ्य ही जीवन का सर्वोच्च धन है।


स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास


“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है” यह उक्ति मानव जीवन के गहनतम सत्य को उजागर करती है। शरीर और मस्तिष्क परस्पर पूरक हैं; एक की सुदृढ़ता दूसरे की सामर्थ्य को सुनिश्चित करती है। जब शरीर स्वस्थ होता है, तब मस्तिष्क भी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करता है; किंतु यदि शरीर रोगग्रस्त या निर्बल हो जाए, तो उसका सीधा प्रभाव विचारों की स्पष्टता, निर्णय-क्षमता और मानसिक संतुलन पर पड़ता है। स्वस्थ शरीर में रक्त संचार सुचारु रहता है, जिससे मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। फलस्वरूप स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सृजनात्मकता का विकास होता है। इसके विपरीत, अस्वस्थ शरीर थकान, तनाव और चिड़चिड़ेपन को जन्म देता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को क्षीण कर देता है।


नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त निद्रा शरीर को सुदृढ़ बनाते हैं, वहीं योग और ध्यान मन को स्थिरता और शांति प्रदान करते हैं। जब शरीर और मन दोनों संतुलित होते हैं, तभी व्यक्ति अपने कार्यों को दक्षता और समर्पण के साथ संपन्न कर पाता है तथा जीवन में सफलता के शिखर तक पहुंचता है। स्पष्टतः, शारीरिक स्वास्थ्य ही मानसिक दृढ़ता की आधारशिला है, और संतुलित जीवन शैली ही इस सिद्धांत को सार्थक बनाती है।


विश्व स्वास्थ्य दिवस का इतिहास और मनाने का उद्देश्य


विश्व स्वास्थ्य दिवस का मूल उद्देश्य वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। प्रत्येक वर्ष इस दिवस की एक विशिष्ट थीम निर्धारित की जाती है, जो उस समय की प्रमुख स्वास्थ्य समस्या पर केंद्रित होती है। चाहे वह मानसिक स्वास्थ्य हो, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव या महामारी नियंत्रण। WHO के अनुसार, स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की पूर्ण अवस्था है। यही समग्र और व्यापक दृष्टिकोण विश्व स्वास्थ्य दिवस की आत्मा है, जो मानवता को एक स्वस्थ, संतुलित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अग्रसर होने का मार्ग प्रशस्त करता है।


स्वास्थ्य यानी शरीर से मन तक एक समग्र दृष्टि


स्वास्थ्य को यदि केवल रोगों की अनुपस्थिति तक सीमित कर दिया जाए, तो यह उसकी अधूरी व्याख्या होगी। वास्तव में स्वास्थ्य एक बहुआयामी अवधारणा है, जिसमें शरीर, मन और समाज तीनों का संतुलित समन्वय निहित है। शारीरिक स्वास्थ्य- व्यक्ति की कार्यक्षमता, ऊर्जा और रोग-प्रतिरोधक क्षमता का द्योतक है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त विश्राम इसके आधार स्तंभ हैं। मानसिक स्वास्थ्य -आधुनिक युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। प्रतिस्पर्धा, तनाव और भागदौड़ भरे जीवन में अवसाद, चिंता और अकेलेपन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो मन की स्थिरता को चुनौती देती हैं। सामाजिक स्वास्थ्य- व्यक्ति के संबंधों, संवाद और सहयोग की गुणवत्ता से जुड़ा है। एक संतुलित सामाजिक जीवन व्यक्ति को मानसिक संतोष और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है।


बीमारियों का बढ़ता खतरा आधुनिक जीवन की विडंबना


विकास और तकनीकी प्रगति के इस दौर में भी मानव अनेक प्रकार की बीमारियों से जूझ रहा है, जो जीवन शैली और पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम हैं। संक्रामक रोग सूक्ष्म जीवों बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और परजीवियों के कारण उत्पन्न होते हैं और तीव्र गति से फैलते हैं। ये रोग वायु, जल, भोजन, संपर्क या कीटों के माध्यम से प्रसारित होते हैं। COVID-19, टीबी, डेंगू और मलेरिया जैसे रोग इस श्रेणी के प्रमुख उदाहरण हैं। अस्वच्छता, भीड़भाड़ और कमजोर प्रतिरक्षा इनकी जड़ में होते हैं। समय पर जागरूकता, स्वच्छता, टीकाकरण और सावधानी से इन पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। गैर-संक्रामक रोग (NCDs) आधुनिक जीवनशैली की देन हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसे रोग धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करते हैं और दीर्घकालिक होते हैं। असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, धूम्रपान और प्रदूषण इनके प्रमुख कारण हैं। इनसे बचाव के लिए अनुशासित जीवन शैली और नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है।


मानसिक रोग अदृश्य, पर गहन संकट


मानसिक रोग वे स्थितियां हैं, जो व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करती हैं। अवसाद, चिंता विकार, बाइपोलर डिसऑर्डर और सिज़ोफ्रेनिया जैसे रोग बाहरी रूप से भले ही दिखाई न दें, परंतु इनके प्रभाव अत्यंत व्यापक होते हैं। इनका मूल कारण केवल जैविक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक भी होता है। तनाव, अकेलापन, पारिवारिक तनाव और आर्थिक दबाव इसकी जड़ में होते हैं। दुर्भाग्यवश, सामाजिक कलंक के कारण लोग इन्हें स्वीकारने से हिचकते हैं, जिससे समस्या और जटिल हो जाती है। समय पर पहचान, परामर्श, योग-ध्यान और पारिवारिक सहयोग मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।


उपचार से अधिक प्रभावी उपाय


“रोकथाम उपचार से बेहतर है” यह सिद्धांत स्वास्थ्य के संदर्भ में पूर्णतः सत्य सिद्ध होता है। संतुलित और पौष्टिक आहार शरीर को ऊर्जा और प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। नियमित व्यायाम और योग शरीर को सक्रिय तथा मन को शांत रखते हैं। स्वच्छता और व्यक्तिगत हाइजीन जैसे हाथ धोना, स्वच्छ जल का उपयोग संक्रामक रोगों से सुरक्षा देते हैं। साथ ही, टीकाकरण गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।


स्वास्थ्य के क्षेत्र में ग्रामीण-शहरी असमानता


भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ग्रामीण-शहरी असमानता है, जो समग्र विकास की राह में गंभीर अवरोध बनकर उभरती है। शहरी क्षेत्रों में जहां आधुनिक अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हैं, वहीं ग्रामीण भारत आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संघर्ष करता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी, डॉक्टरों का अभाव और जागरूकता की न्यूनता इस असमानता को और गहरा करते हैं। इसके साथ ही कुपोषण और गरीबी स्वास्थ्य संकट को और जटिल बना देते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग न तो संतुलित आहार प्राप्त कर पाता है और न ही समय पर उपचार की सुविधा ले पाता है। विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे कुपोषण के सबसे अधिक शिकार होते हैं, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित होती है। गरीबी, बीमारी और कुपोषण का यह दुष्चक्र पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।


स्वास्थ्य सुविधाओं की असमान उपलब्धता भी एक गंभीर समस्या है। कई दूरदराज़ क्षेत्रों में अस्पतालों तक पहुंचना कठिन है, जिससे छोटे रोग भी गंभीर रूप ले लेते हैं। इसके अतिरिक्त, भारत की विशाल जनसंख्या स्वास्थ्य तंत्र पर अत्यधिक दबाव डालती है। सीमित संसाधनों में बढ़ती जनसंख्या के कारण गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन परिस्थितियों में आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवाओं का समान वितरण सुनिश्चित किया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जाए और पोषण एवं जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए। तभी एक स्वस्थ, समतामूलक और सशक्त भारत का निर्माण संभव हो सकेगा।


स्वस्थ राष्ट्र की ओर बढ़ता कदम


भारत सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। Ayushman Bharat Yojana के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। National Health Mission ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का व्यापक प्रयास है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने वाले स्वच्छ भारत अभियान ने स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।


आयुर्वेद और योग में निहित है स्वास्थ्य का विज्ञान


भारतीय ज्ञान परंपरा में स्वास्थ्य का दृष्टिकोण सदैव समग्र और संतुलित रहा है, जिसका श्रेष्ठ उदाहरण Ayurveda और योग हैं। आयुर्वेद, जिसका अर्थ है “जीवन का विज्ञान”, केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के माध्यम से दीर्घायु और स्वस्थ जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें वात, पित्त और कफ -इन तीन दोषों के संतुलन को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। वहीं, योग शरीर और मन को एक सूत्र में बांधने की साधना है। प्राणायाम, आसन और ध्यान के माध्यम से योग न केवल शारीरिक लचीलापन और शक्ति बढ़ाता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता भी प्रदान करता है। आयुर्वेद और योग का मूल उद्देश्य रोग होने से पहले ही उसके कारणों को समाप्त करना है। आज की भागदौड़ भरी जीवन शैली में ये दोनों विधाएं प्राकृतिक और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। इस प्रकार, आयुर्वेद और योग केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन हैं, जो मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं।


भारत वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिम्‍मेदार भागीदार के रूप में अग्रसर


भारत आज वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में एक सशक्त और जिम्मेदार भागीदार के रूप में उभरा है। COVID-19 के दौरान भारत ने वैक्सीन निर्माण और आपूर्ति में अग्रणी भूमिका निभाकर विश्व को सहयोग का संदेश दिया। “वैक्सीन मैत्री” जैसी पहल ने भारत की मानवीय प्रतिबद्धता को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया। World Health Organization की दृष्टि में भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था एक सशक्त, गतिशील और अपार संभावनाओं से युक्त प्रणाली के रूप में उभरी है, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद उल्लेखनीय उपलब्धियों का इतिहास रचा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी, व्यापक टीकाकरण अभियानों का सफल विस्तार तथा संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण ये सभी भारत की स्वास्थ्य प्रतिबद्धता के सशक्त प्रमाण हैं। आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की पहल, डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार तथा जन औषधि केंद्रों की स्थापना ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


बदलती दुनिया, बदलती बीमारियां


आधुनिक युग में स्वास्थ्य क्षेत्र नई चुनौतियों से जूझ रहा है- जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न रोग, एंटीबायोटिक प्रतिरोध, मानसिक स्वास्थ्य संकट और नई महामारियों का खतरा। इनसे निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय प्रयास पर्याप्त नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग, वैज्ञानिक नवाचार और सतत विकास की नीतियां आवश्यक हैं।


स्वस्थ जीवन ही सच्ची समृद्धि


स्वास्थ्य मानव जीवन की वह अमूल्य संपदा है, जो केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाती है। World Health Day हमें यह स्मरण कराता है कि स्वास्थ्य केवल निजी विषय नहीं, बल्कि सामूहिक उत्तरदायित्व है। एक स्वस्थ नागरिक ही एक सुदृढ़ और प्रगतिशील राष्ट्र की आधारशिला रखता है। आज की भागदौड़ भरी जीवन शैली में आवश्यक है कि हम अपने दैनिक जीवन में सरल किन्तु प्रभावी परिवर्तन अपनाएं। संतुलित एवं पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें, नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, मानसिक संतुलन बनाए रखें तथा स्वच्छता को जीवन का अभिन्न मूल्य समझें। ये छोटे-छोटे कदम दीर्घकालिक स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखते हैं।


स्वास्थ्य कोई प्राप्त करने योग्य अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि निरंतर साधना की प्रक्रिया है। एक ऐसी सतत यात्रा, जो जीवन को केवल दीर्घ नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और संतुलित बनाती है। जब शरीर सुदृढ़, मन शांत और सामाजिक वातावरण संतुलित होता है, तभी समृद्धि का वास्तविक अर्थ साकार होता है। अतः समय का स्पष्ट आह्वान है कि हम स्वास्थ्य को अपनी जीवनशैली का मूल मंत्र बनाएं, सिर्फ रोगों से बचाव के लिए नहीं, बल्कि एक संतुलित, सुखी और सार्थक जीवन के निर्माण के लिए।

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Indian shooters set to begin ISSF World Cup campaign with mixed team events

April 07, 2026


 Indian shooters are set to begin their campaign at the ISSF Rifle and Pistol World Cup with mixed team events in 10m air rifle and 10m air pistol competitions at Granada in Spain today. 

 

In the pistol event, Palak Gulia will pair with Mukesh Nelavalli, while Sainyam will team up with Ujjawal Malik. They will face tough competition from top international shooters, especially strong teams from China, including world champions Hu Kai and Yao Qianxun and Olympic gold medallist Xie Yu with Shen Yiyao.

 

In the 10m air rifle event, India will field two teams: Sonam Maskar with Gajanan Khandagale, and Shruti with Arshdeep Singh. They will compete against top-ranked shooters, including world No. 1 Sheng Lihao and Wang Zifei of China, along with other strong teams from Norway, Germany, and Hungary.

 

India has selected shooters ranked 4th to 6th nationally, giving younger athletes a chance to prove themselves. 

 

With the World Championships later this year offering qualification spots for the 2028 Olympics, this event is important for testing form and building experience ahead of major competitions like the Asian Games.

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IPL: KKR vs Punjab Kings Match Abandoned Due to Rain

April 07, 2026

 


In IPL Cricket, the match between Kolkata Knight Riders and Punjab Kings was abandoned due to rain at the Eden Gardens in Kolkata last night. Opting to bat after winning the toss, Kolkata Knight Riders got off to a disastrous start, reaching 25 for the loss of two wickets in just 3.4 overs before rain halted play.

 

Punjab Kings pacer Xavier Bartlett dismissed overseas stars Finn Allen and Cameron Green in the second over. With no result possible, both teams shared a point each. It was the first point for the Ajinkya Rahane-led Kolkata Knight Riders, while the Shreyas Iyer-led Punjab Kings moved to the top of the points table, remaining unbeaten with two wins and one no-result.

 

In today’s fixture, Rajasthan Royals will take on Mumbai Indians at the Barsapara Cricket Stadium in Guwahati at 7:30 PM Indian Standard Time. Rajasthan Royals are currently placed third on the points table, while Mumbai Indians are in sixth position. Royal Challengers Bengaluru occupy the second spot. 

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Sensex gains 510 points to close at 74,617; Nifty rises 155 points to settle at 23,124

April 07, 2026


Benchmark domestic equity indices climbed around 0.7% after a choppy trading session today, extending their winning streak for a fourth straight session.


The Sensex rose 510 points to close at 74,617, while Nifty added 155 points to settle at 23,124. In the broader market on the National Stock Exchange, the Mid-cap 100 gained 0.2%, while the Small-cap 100 closed marginally lower.


The markets opened the day with a gap down of over 0.5% and traded in the negative zone during the first half. However, in the latter half, they staged a strong recovery and ended the session on a bullish note. The Sensex rebounded by over 1,300 points, while the Nifty recovered more than 400 points from their intraday lows.


In the forex market today, the rupee appreciated by eight paise to close at 92 rupees and 98 paise against the US dollar.

Sensex gains 510 points to close at 74,617; Nifty rises 155 points to settle at 23,124 Sensex gains 510 points to close at 74,617; Nifty rises 155 points to settle at 23,124 Reviewed by SBR on April 07, 2026 Rating: 5
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